नटराज स्तुति सत् सृष्टि तांडव रचयिता
तूने अजब रचा भगवान।
ऐसे राम निरंजन राया जन हरिराम
उमर सारी बीती मनड़ा मान ले कीयो॥
कौनसे मन्दिर जाऊँ सखी मानसिंह
साधो ज्ञान घटा झुक आया बनानाथ
प्रभु जी मेरे अवगुण चित्त न धरो
गीता में भी यही लिखा है, यही है वेद पुराण में।
जग में गुरु जैसा नहीं मीत
साधो यह जग राम बगीचा॥
राम दरबार है जग सारा
अगम निगम निराला गणपति हीरानंद जी
कहनी के बहुत मजूर दास सतार
हमारे गुरु वचनन की टेक सहजो
करो मन गुरु चरण सूँ प्रीत।
वैष्णव जन तो तेने कहिये नरसी
चालो सन्तो निज आतम घर देस मानसिंह
राम का गुणगान करिए॥
जो आशिक़ मस्त फ़कीरी के लालदास
कलयुग बैठा मार कुण्डली
ठहरी नहीं ये उम्र भी
महाराणा प्रताप देशभक्ति गीत
तूने हीरा गँवाया, माटी के मोल॥
अजब अनादि निगम रास्ता हीरानंद जी
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना।
बिन सत्संग कुमति न छूटी विवेक
साधो अविगत लख्यो न जाई बनानाथ
तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो
मैं तो तेरा दास प्रभु परमानंद
ज्ञानी करता घट में पूजा दास सतार
गुरु दाता म्हारी या अरजी सुन लीजै कल्याण भारती
एक क्षण में योगी, एक क्षण में भोगी
चल हंसा उन देश, समंद जहाँ मोती भवानीनाथ
हम पूरबला पंछी सन्तो हीरानंद जी
काई ल्यायो ले ज्यालो प्यारा बाँध गठरी में।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ लेके आयी स्वामी रामतीर्थ
आप गुरु मोहे त्यारोला हीरानंद जी
हे गिरधारी - २...... कृष्ण मुरारी
हरि म्हारी अरजी सुन लीजै कल्याण भारती
निद्रा बेच दूँ कोइ ले तो भर्तृहरि
सर्वं ब्रह्ममयं रे रे! सर्वं ब्रह्ममयं
सैयां सद्गुरु भल आया ये मानसिंह
गुरु दर्शन भगवान का दरसन
जाप अजपा जपो गायत्री गुणदास
अब मोरी नैया पार करो तुम
धन गुरु हमें तुम्हारी आसा कल्याण भारती
जल जाये जिह्वा पापिनी राम के बिन
निसदिन नमो गणपति चरण
सुन उधो लागे संत पियारा हो परमानंद
रख लाज मेरी गणपति
ईशावास्योपनिषद् Ishavasyopnishad
माण्डूक्योपनिषद्
ॐ जय भगवद्गीते Aarti
जाने क्या जादू भरा हुआ