🕉️🎯👌🏻श्री हरिपुरुषाय नमः🌍🫂 

Shankaram Shampradam Sajjnanddam

Tulsidas Vinay Patrika 10 विनय पत्रिका 


शंकरं शंप्रदं सज्जनानन्ददं, शैल  कन्या  वरं  परमरम्यम्।

काम मद मोचनं तामरस लोचनं वामदेवं भजे भावगम्यम्॥


कल्याणकारी, कल्याण के दाता, संतजनों को आनन्द देने वाले, हिमाचलकन्या पार्वती के पति, परम रमणीय, कामदेव के घमण्ड को चूर्ण करने वाले, कमलनेत्र, भक्ति से प्राप्त होने वाले महादेव का मैं भजन करता हूँ।


कम्बु  कुन्देंदु   कर्पूर  गौरं   शिवं   सुन्दरं   सच्चिदानन्दकन्दम्।

सिद्ध सनकादि योगीन्द्र वृंदारका, विष्णुविधिवन्द्य चरणारविन्दम्॥


जिनका शरीर शंख, कुन्द, चन्द्र और कर्पूर के समान चिकना, कोमल, शीतल, श्वेत और सुगन्धित है; जो कल्याणरूप, सुन्दर और सच्चिदानन्द कन्द हैं । सिद्ध, सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार, योगिराज, देवता, विष्णु और ब्रह्मा जिनके चरणारविन्द की वन्दना किया करते हैं।


ब्रह्म कुल वल्लभं, सुलभ मति दुर्लभं, विकट वेषं विभुं वेदपारम्।

नौमि   करुणाकरं, गरल   गंगाधरं, निर्मलं  निर्गुणं  निर्विकारम्॥


जिनको ब्राह्मणों का कुल प्रिय है; जो संतों को सुलभ और दुर्जनों को दुर्लभ हैं; जिनका वेष बड़ा विकराल है; जो विभु हैं और वेदों से अतीत हैं; जो करुणा की खान हैं; गरल को (कण्ठ में) और गंगाको (मस्तक पर) धारण करने वाले हैं; ऐसे निर्मल, निर्गुण और निर्विकार शिवजी को मैं नमस्कार करता हूँ।


लोकनाथं  शोक  शूल  निर्मूलिनं, शूलिनं मोह  तम भूरि भानुम्।

कालकालं कलातीतमजरं, हरं कठिन कलिकाल कानन कृशानुम्॥


जो लोकों के स्वामी, शोक और शूल को निर्मूल करने वाले; त्रिशूलधारी तथा महान् मोहान्धकार को नाश करने वाले सूर्य हैं । जो काल के भी काल हैं, कलातीत हैं, अजर हैं, आवागमनरूप संसार को हरने वाले और कठिन कलिकालरूपी वन को जलाने के लिये अग्नि हैं।


तज्ञमज्ञान   पाथोधि   घटसम्भवं, सर्वगं   सर्वसौभाग्यमूलम्।

प्रचुरभवभंजनं, प्रणतजनरंजनं, दास तुलसी शरण सानुकूलम्॥


यह तुलसीदास उन तत्त्ववेता, अज्ञानरूपी समुद्र के सोखने के लिये अगस्त्यरूप, सर्वान्तर्यामी, सब प्रकारके सौभाग्य की जड़, जन्म-मरणरुप अपार संसारका नाश करने वाले, शरणागत जनों को सुख देने वाले, सदा सानुकूल शिवजी की शरण है।