🕉️🎯👌🏻श्री हरिपुरुषाय नमः🌍🫂
Dil Vo Aabad nahi Jisme Teri Yad Nahi Ghazal
ढूँढता है दिल जिसे वो आश्ना¹ तुम्ही तो हो।
यानी मेरी जिन्दगी का आसरा तुम्ही तो हो॥
प्रियतम/प्राणनाथ¹
दिल वो आबाद नहीं जिसमें तेरी याद नहीं।
है वो काफ़िर जो तेरी राह में बर्बाद नहीं॥
ऐ ग़म-ए-यार¹ तेरे दम से है तामीर-ए-हयात²।
तू सलामत है तो हस्ती मेरी बर्बाद नहीं॥
(दीनबन्धु¹) (जीवन का अस्तित्व²)
मैं तुझमें ऐसा समा जाऊँ कि मैं ही ना रहूँ।
तू मुझमें ऐसा समा जा कि तू ही तू हो जा॥
मुझे दर्द देने वाले तेरी ऐन मेहरबानी।
तेरा ज़िक्र है इबादत तेरा फिक्र जिंदगानी॥
जाम जब पीने लगे मुँह से कहा बिस्मिल्ला।
ये न समझे कोई बन्दों का ख़ुदा याद नहीं॥
बहुत ढूँढा कि तुझे, ऐ मेरे न मिलने वाले।
वो चला ढूँढने जिसे अपना पता याद नहीं॥
सर है सज्दे में तेरा दिल में तलब हूरों की।
फ़लसफ़े-रस्मे-इबादत का तुझे याद नहीं॥
ऐ 'जिगर' है तेरी हस्ती की हक़ीक़त इतनी।
मुझमें है आबाद सब मैं कहीं आबाद नहीं॥