🕉️🎯👌🏻श्री हरिपुरुषाय नमः🌍🫂 

Janchiye Girijapati Kashi Tulsidas 


जाँचिये     गिरिजापति     कासी। 

जासु  भवन  अणिमादिक  दासी॥१॥


पार्वतीपति शिवजी से ही याचना करनी चाहिए, जिनका घर काशी है और अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व और वशित्व नामक आठों सिद्धियाँ जिनकी दासी है।


औढरदानि    द्रवत   पुनि   थोरें। 

सकत  न  देखि  दीन  कर  जोरें॥२॥


शिवजी महाराज औढरदानी हैं, थोड़ी-सी सेवा से ही पिघल जाते हैं। वह दीनों को हाथ जोड़े खड़ा नहीं देख सकते, उनकी कामना बहुत शीघ्र पूरी कर देते हैं।


सुख सम्पत्ति मति सुगति सुहाई।

सकल  सुलभ   संकर  सेवकाई॥३॥


जो आतुर जीव उनकी शरण गये, उन्हें शिवजी ने तुरन्त अपना लिया और देखते-ही-देखते पलभर में निहाल कर दिया।


गये   सरन   आरतिकै   लीन्हे। 

निरखि निहाल निमिषमहँ कीन्हे॥४॥


शंकर की सेवा से सुख सम्पत्ति, सुबुद्धि और उत्तम गति आदि सभी पदार्थ सुलभ हो जाते हैं।


तुलसिदास  जाचक  जस  गावै। 

बिमल भगति  रघुपति की पावै॥५॥


भिखारी तुलसीदास भी यश गाता है, इसे भी राम की निर्मल भक्ति की भीख मिले।

(तुलसीदास, विनय-पत्रिका/शिवस्तुति/६)